- Chinta
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- Jul 27, 2025
Gam Shayari
Kabhi khushi ke peeche bhi ek gam chhupa hota hai.
Yeh shayari un lamho ki hai jab muskurahat ke peeche koi gam chhupa hota hai aur kaha kuch nahi jaata. Chehre ke peeche ki kahani Chehara Shayari mein bhi khoobsurati se bayan hui hai.
- Last Updated on Aug 11, 2026
न दर्द की चिंता, न ग़म की बात,
- Jaan
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- Jan 30, 2022
जीने के लिए जान जरूरी है
कुछ पाने के लिए अरमान जरूरी है
चाहे जितने भी ग़म हो मेरी दुनिया में
तुम्हारे लबों पर मुस्कान जरूरी है.
- Dil
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- Jan 06, 2022
इक इश्क़ का ग़म आफ़त
और उस पे ये दिल आफ़त
या ग़म न दिया होता
या दिल न दिया होता
चराग़ हसन हसरत।।
- Jeevan
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- Jan 06, 2022
ठंडी ठंडी बयार बह रही है
आपके सबके जीवन खुशियां बिखरे
ये बयार बहते हुए कह रही है
ग़म की कश्तियां डूब जाने दो
आज पोंगल पर्व पर
खुशियों खूब आने दो.
- Jeevan
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- Jan 06, 2022
खुशियां ही खुशियां आपके जीवन में हो
ग़म का छाया भी ना पसरे
दुख का एक आंसू ना टपके
आपके चेहरे पर ऐसी मुस्कान बिखरे
पोंगल की शुभकामनाएं.
- Dil
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- Dec 09, 2021
क्यूँ मता-ए-दिल के लुट जाने का कोई ग़म करे
शहर-ए-दिल्ली में तो ऐसे वाक़िए होते रहे
ज़ुबैर रिज़वी
- Dil
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- Dec 09, 2021
बेताबी में हर तरह से बर्बाद रहा
दिल अपना ग़म-ए-दहर से आबाद रहा
फिरता रहा हर शहर में मारा मारा
ऐ लखनऊ तू मुझ को मगर याद रहा
बाक़र मेहदी
- Dil
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- Dec 08, 2021
दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं,
जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते हैं।
- Mar
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- Apr 04, 2021
मैं मर गया तो ख़ाक भी उन को न ग़म हुआ
कहते हैं एक चाहने वाला तो कम हुआ...
~दाग़ देहलवी
- Love
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- Mar 31, 2021
आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या,
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में हैं अरमाँ क्या क्या,
ग़म अज़ीज़ों का हसीनों की जुदाई देखी,
देखें दिखलाए अभी गर्दिश-ए-दौराँ क्या क्या।
- December
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- Jan 06, 2021
रोते हैं जब भी हम दिसम्बर में
जम से जाते हैं ग़म दिसम्बर में,
जो हमें भूल ही गया था उसे
याद आए हैं हम दिसम्बर में !!
- Jul 29, 2019
ग़म-ओ-आलम की दुनिया में, कोई भी ख़ुश नही रहता...
कहीं पर सोच जलती हैं, कहीं अरमान जलते हैं...!!
- Ham
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- Sep 28, 2018
इन ग़म की गलियों में कब तक ये दर्द हमें तड़पाएगा..
इन रस्तों पे चलते-चलते हमदर्द कोई मिल जाएगा.