- Diya
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- Jul 06, 2023
Shahar Shayari - Sheher Ki Khamoshi Aur Kahani
Har shahar ki apni ek chuppi hoti hai - shahar shayari usi ko sunati hai.
धुंधले दिनों और नशीली रातों की कहानी कहने वाले शहरों से लेकर ग़ालिब के आगरा तक, shahar shayari हर शहर की अपनी एक अलग कहानी सुनाती है। छोटे अंदाज़ में यही बात 2 Line में भी मिलती है।
- Last Updated on Aug 11, 2026
बड़ी ख़ामोशी से भेजा था गुलाब उसको,
- Kal
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- Jun 21, 2023
हमें तो नफरत हो गयी थी उस निर्दयी शहर से,
पर क्या पता था वहाँ भी कोई अपना निकल आएगा !!
- Jaan
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- Jan 07, 2022
पतंग उड़ाने से पहले ये जान लेना था
कि इस की असल है क्या और माहियत क्या है
-शहराम सर्मदी
- Delhi
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- Jan 06, 2022
यूँ तो मकान मेरा भी है, तेरे ही शहर में 'ग़ालिब',
जहाँ तेरा घर तो घर, उर्दू भी लापता है..
कौन कहता है अब की तू 'आगरा' से था,
आवाम को तो बस, 'दिल्ली' का ही पता है।
- Ham
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- Jan 06, 2022
ग़ालिब के शहर "आगरा" में तो हम पैदा नहीं हुए है जनाब,
मगर ताल्लुक हम भी 'अपणायत' वाले शहर "जोधपुर" से रखते है।
- Love
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- Dec 13, 2021
ये मोहब्बत का शहर है साहब,
यहाँ सवेरा सूरज से नही…
बल्कि किसी के दीदार से होता है।
- Maa
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- Dec 09, 2021
माँ गंगा मैली नही होती है,
पापियों के नहाने से,
माँ गंगा मैली होती है,
शहर और कारखानों का कूड़ा बहाने से.
- Dua
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- Dec 09, 2021
बद्दुआ कैसे दूँ उस शहर को
जो भूखे पेट को भरता है,
मगर पीने का पानी और
माँ गंगा को दूषित करता है.
- Kuch
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- Dec 09, 2021
चलो जाज्मी था मेरा तेरे शहर इलाहाबाद आना,
कुछ सीखा हो या ना सीखा हो पर संभलना जरूर सीख लिया.
- Delhi
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- Dec 09, 2021
कहीं मुकम्मल जमीन नहीं मिलती,
कहीं आसमान नहीं मिलता,
दिल के शहर दिल्ली में हर किसी को
अपना मकान नहीं मिलता.
- Dil
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- Dec 09, 2021