वो आँख क्या जो ग़ैर की ख़ातिर न रो सके

वो आँख क्या जो ग़ैर की ख़ातिर न रो सके

वो आँख क्या जो ग़ैर की ख़ातिर न रो सके...
वो दिल ही क्या जिसमें ज़माने का ग़म नही...!!


Vo aankh kya jo gair kee khaatir na ro sake...
Vo dil hee kya jisamen zamaane ka gam nahee...!!