Zakhm Shayari
Un zakhmo ki baat jo dikhte nahi, sirf mehsoos hote hain.
Zakhm hamesha zahir nahi hote, kai baar wo apno ke diye hue hote hain aur andar hi andar sulagte rehte hain. Agar dil se juda dard pasand hai to Dard-bhari Shayari bhi zaroor dekhein.
- Last Updated on Aug 11, 2026
- Kapde
- |
- Feb 03, 2017
में ज़ख़्म हूँ, जाकर गले लगूँ किस से...!!
नमक से तर कपडे, यहाँ पहने हैं सभी ने...!!
- Kaante
- |
- Feb 02, 2017
सब फूल लेकर गए...मैं कांटे ही उठा लाया....
पड़े रहते तो किसी क़े पाँव मे जख्म दे जाते.......!!
- Jan 24, 2017
जुबां तीखी होतो,खंजर से गहरा जख्म देती है...
और मीठी हो तो,वैसे ही कत्ल कर देती है...!!
- Sad
- |
- Jan 24, 2017
मने उतार दिये है तेरी मोहब्बत के सभी क़र्ज,
अब हिसाब तेरे दिये हुये जख्मो का होगा !!
- Ham
- |
- Jan 07, 2017
अपने जख्मों पे, खुद मरहम लगाना सीख ले अब...
काम कब आते है कभी, गम में ज़माने वाले...!!
- Hindi
- |
- Nov 16, 2016
ज़ख्मों को अपने अब ढक कर चलना ही ठीक होगा....
आजकल लोगों के लहजों में भी 'नमक' झलकता है
- Dard-bhari
- |
- Nov 16, 2016
वो जान गयी थी हमें दर्द में मुस्कराने की आदत हैं,
वो नया जख्म दे गई मेरी ख़ुशी के लिए…
- Sad
- |
- Nov 04, 2016
बदन के घाव दिखाकर जो अपना पेट भरता है....
सुना है वो भिखारी जख्म भर जाने से डरता है....
- Ham
- |
- Nov 04, 2016
तमाम जख्मों के साथ इसलिये जी रही हु कि,
एक दिन तो वो मिलेगा जो मरहम लगाना जानता है..
- Galati
- |
- Nov 04, 2016
हाथ ज़ख़्मी हुए तो कुछ अपनी ही गलती थी,
लकीरों को मिटाना चाहा था किसी को पाने के लिए.......॥
- Ham
- |
- Nov 03, 2016