Waqt Shayari - Waqt Badle, Pyaar Nahi
Waqt kaisa bhi ho, shayari usi ke rang mein dhal jaati hai.
वक़्त के विरुद्ध खड़े होकर भी लड़ते रहने के हौसले से लेकर हालात बदलने पर भी मोहब्बत के न बदलने के भरोसे तक, waqt shayari मुश्किल घड़ी और मोहब्बत के भरोसे दोनों को छूती है। गहरी बातों के लिए Anmol Vachan भी पढ़ें।
- Last Updated on Aug 11, 2026
- Din
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- Nov 16, 2016
वो कहता है बड़ी मजबूरियाँ हैं वक़्त की इन दिनों,
साफ लफ़्ज़ों में वो खुद को बेवफ़ा क्यों नहीं कहता...
- Jaroorat
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- Nov 11, 2016
ज़िन्दगी यूँ ही बहुत कम है मुहब्बत के लिए,
फिर रूठकर वक़्त गवाँने की जरूरत क्या है........
- Ham
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- Nov 11, 2016
मुड़-मुड़ कर देखा था जाते वक़्त रास्ते में उन्होंने...
जैसे कुछ जरुरी था..जो वो हमें बताना भूल गये...
- Dil
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- Nov 04, 2016
इक दुकान ऐंसी भी है जहाँ तुम मुल्कभी खरीद सकते हो,
वक्त मिले तो आना दिल्ली में, वो भी दुकान दिखायेंगे तुम्हें.....
- Kaash
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- Nov 04, 2016
काश इस गुमराह दिल को ये मालूम होता कि..
मोहब्बत उस वक्त तक ही दिलचस्प होती है..
जब तक नहीं होती है.
- Dost
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- Nov 03, 2016