Waqt Shayari - Waqt Badle, Pyaar Nahi
Waqt kaisa bhi ho, shayari usi ke rang mein dhal jaati hai.
वक़्त के विरुद्ध खड़े होकर भी लड़ते रहने के हौसले से लेकर हालात बदलने पर भी मोहब्बत के न बदलने के भरोसे तक, waqt shayari मुश्किल घड़ी और मोहब्बत के भरोसे दोनों को छूती है। गहरी बातों के लिए Anmol Vachan भी पढ़ें।
- Last Updated on Aug 11, 2026
- Haar
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- Mar 08, 2017
मैं तो वक्त से हार कर सर झुकाएँ खड़ा था,
सामने खड़े कुछ लोग ख़ुदको बादशाह समझने लगे...
- Hindi
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- Feb 27, 2017
उलझ गया था तुम्हारे दुपट्टे का कोना मेरी घड़ी से
वक्त तब से जो रुका है तो अब तक रुका ही पड़ा है