पिज्जा मुझे अपना दीवाना बना ना सकी,

पिज्जा मुझे अपना दीवाना बना ना सकी,

पिज्जा मुझे अपना दीवाना बना ना सकी,
शहर की चकाचौध मुझे लुभा ना सकी,
नुक्क्ड़ के समोसे खाकर खुश हो जाता हूँ
आज भी मैं खुद के अंदर इक गाँव पाता हूँ.


Pijja mujhe apana deevaana bana na sakee,
Shahar kee chakaachaudh mujhe lubha na sakee,
Nukkd ke samose khaakar khush ho jaata hoon
Aaj bhee main khud ke andar ik gaanv paata hoon.