Hak Shayari - Chaahat Aur Adhikar Ka Fasla
Kisi ko apna kehne ka haq maangna bhi ek shayari hai.
मुक़द्दर हमेशा साथ न भी दे, फिर भी दिल से किसी को अपना मान लेने की चाहत कम नहीं होती - हक़ शायरी इसी अधूरी ख्वाहिश और अपनेपन की तलाश को शब्द देती है। दिल की इसी उलझन को Dil शायरी में और गहराई से पढ़ें।
- Last Updated on Aug 11, 2026
- Badal
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- Apr 11, 2017
अपनी सोच के दायरे से रूबरू कराती है जिंदगी...
बदलता कोई नही जरूरतें महकाते हैं रिश्ते...!!
- Aap
- |
- Mar 02, 2017
नाराज़गियाँ भी क़ुबूल थी, आपकी हमें मगर....
एक बार हक़ से गले हमें, लगाया तो होता...!!