- Botal
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- Feb 27, 2017
Gam Shayari
Kabhi khushi ke peeche bhi ek gam chhupa hota hai.
Yeh shayari un lamho ki hai jab muskurahat ke peeche koi gam chhupa hota hai aur kaha kuch nahi jaata. Chehre ke peeche ki kahani Chehara Shayari mein bhi khoobsurati se bayan hui hai.
- Last Updated on Aug 11, 2026
जैसे जैसे ख़ाली होती है बोतल,
- Ham
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- Feb 01, 2017
हम सोच रहें हैं मुद्दत से अब उम्र ग़ुज़ारें भी तो कहाँ,
सेहरा में खुशी के फूल नहीं शहरों में ग़मों के साये हैं
- Mar
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- Jan 31, 2017
उमर भर तेरे ग़म से निभाया जाये
इससे बेहतर है......किसी और शख़्स को चाहा जाये...!!
- Ham
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- Jan 23, 2017
मैं हँसता हूँ तो बस अपने ग़म छिपाने के लिए..
और लोग देख के कहते है काश हम भी इसके जैसे होते.
- Hindi
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- Nov 19, 2016
हम पटरियों की तरह ज़मीं पर ही पड़े रहे,
सीने से ग़म गुज़रते रहे रेलगाड़ी की तरह..
- Shaam
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- Oct 21, 2016