- Kuch
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- Jan 09, 2022
Dor Shayari
Kabhi patang ki dor, kabhi dil ka dhaaga — dono kahani ek si hai.
Makar Sankranti ke aasman se ud rahi patangon se lekar saanson ki dor tak, yeh sher zindagi aur rishton ko ek hi dhaage se bandhe dikhate hain. Kuch aur gehre jazbaat ke liye humari Dil shayari bhi padhein.
- Last Updated on Aug 11, 2026
पतंग कटने का बाइस और है कुछ
- Chaah
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- Jan 06, 2022
मैं हूँ पतंग-ए-काग़ज़ी डोर है उस के हाथ में
चाहा इधर घटा दिया चाहा उधर बढ़ा दिया
- नज़ीर अकबराबादी
- Aasmaan
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- Jan 06, 2022
काट ना सके कभी कोई पतंग आपकी,
टूटे ना कभी डोर विश्वास की,
छू लो आप ज़िन्दगी की सारी कामयाबी,
जैसे पतंग छूती है ऊंचाइयां आसमान की.
मकर संक्राति की हार्दिक शुभकामनाएं!!
- Dard-bhari
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- Dec 09, 2021
सांसों की डोर छूटती जा रही है
किस्मत भी हमे दर्द देती जा रही है
मौत की तरफ हैं कदम हमारे
मोहब्बत भी हम से छूटती जा रही है
- Dosti
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- Sep 18, 2021
उसने काटी हमारी डोरी
हमने देख फ़िदा हुए उनके लब।
उस डोरी से उड़ाये जब वह पतंग
लगे दिल ही उड़ रहा है अब।
- Patang
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- Sep 15, 2021
खींची प्यार की डोरी
पतंग संग चली आयी गौरी।
फिर लड़े नैन के पैचे
और पड़ोस के बच्चों ने पतंग जा तोड़ी।
- Haar
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- Apr 02, 2021
देखा है तुम्हारे आगे,
शर्मा के फूलों को मुरझाते,
ए जहाँ को घायल करने वाले
तुम डिओडोरेंट क्यों नहीं लगाते।
- Dast
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- Jan 15, 2021
धूप के कुछ टुकड़े टँगे हैं बादलों की डोर पे
नवंबर ने दे दी है दस्तक बहक के हर ओर से !!
- Bachpan
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- Jan 07, 2021
छज्जे से अटकी थी वो पतंग, हल्ला मोहल्ले में था,
एक मांझे की डोर टूटी थी और ये किस्सा बचपन में था।
- Ham
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- Sep 25, 2018
लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
(रिश्ता – डोरा, तागा,सम्बन्ध, नाता, लगाव)