Din Shayari - Har Din Ki Apni Kahani
Har din ek naya ehsaas le kar aata hai.
"दिन" यहाँ कई मायनों में आता है - कभी चार दिन के इश्क़ की बात, कभी किसी के लौट आने के इंतज़ार में गुज़रते दिन, और कभी त्योहार के पावन दिन की खुशी। हर लाइन वक़्त के गुज़रने और लौटने की उम्मीद को छूती है। दिल से जुड़ी बात के लिए Dil भी पढ़ें।
- Last Updated on Aug 11, 2026
- Dil
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- Feb 02, 2017
फूल पे सरसों के थोड़े दिन अभी रुकना, बसंत...
शहर दे फुरसत तो दिल तुझसे लगाने आएंगे...!!
- Aadat
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- Jan 26, 2017
एक आदत सा बन गया है गणतंत्रता का दिन भी,
कुछ जुमले चलेंगे और फिर कूड़ेदानों में झंडे मिलेंगे
- Bhaarat
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- Jan 26, 2017
#इस्लाम* मेरा दीन है, और *#भारत* मेरा #वतन...
*ना में मेरा दिन छोड़ सकता हु, ना मेरा वतन
- Ham
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- Jan 24, 2017
झूठ बोलते थे कितना...फिर भी सच्चे थे हम..
ये उन दिनों की बात है...जब बच्चे थे हम....!
- Chand
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- Jan 23, 2017
बुरे वक्त में ही सबके असली रंग दिखते हैं
दिन के उजाले में तो पानी भी चांदी लगता है…!!
- Aaj
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- Jan 23, 2017
मैने यादें उठाकर देखी थी आज..
एक दिन तुम मेरे थे
- Kuch
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- Jan 18, 2017
ज़रा और कुछ दिन नाराज़ रहूँ
अब वो भी मनाने लगा है मुझे
- Dil
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- Jan 16, 2017
वो तो दिल है जो आपकी उल्फ़त में बहला रहा,
वरना दुनिया तो चार दिन भी रहने के काबिल नही ।