Zahar Shayari
When kindness turns bitter and love learns to sting
Zahar shayari plays with the thin line between medicine and poison, describing how the same person can be someone's Dava and someone else's zahar depending on who's asking.
- Last Updated on Aug 11, 2026
- Dava
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- Aug 09, 2018
ज़िन्दगी है चार दिन की, कुछ भी न गिला कीजिये
दवा, ज़हर, जाम, इश्क, जो मिले मज़ा लीजिये।
- Sabr
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- Jul 22, 2018
सब्र का घूंट दूसरो को पिलाना कितना आसान लगता है...
ख़ुद पियो तो क़तरा क़तरा ज़हर लगता है...!!
- Ghulam
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- Jun 15, 2018
गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं
में आ गया हु बता इंतज़ाम क्या क्या हैं
फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या हैं
- Din
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- May 06, 2018
ज़िन्दगी है दो दिन, कुछ भी न गिला कीजिये...
दवा ,ज़हर ,जाम ,इश्क ,जो मिले चख लीजिये...!!
- Man
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- Jan 25, 2017
ज़हर तो पी लूँ शौक से तेरी खातिर,
पर शर्त ये है कि तुम सामने बैठ कर साँसों को टुटता देखो
- Nov 19, 2016
पेट में गया ज़हर सिर्फ एक व्यक्ति को मारता है
कान में गया ज़हर कई रिश्तों को मारता है ! !
- Sad
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- Nov 02, 2016
वो ज़हर देता तो दुनिया की नज़रों में आ जाता,
सो उसने यूँ किया के वक़्त पे दवा न दी...
- Aam
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- Oct 21, 2016