- Ham
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- Jun 21, 2023
Jism Shayari
When love reaches past the body and settles in the soul
Jism shayari on this page leans on the classic body-versus-soul metaphor, insisting that real love touches the rooh long before it ever touches the Dil or the body.
- Last Updated on Aug 11, 2026
भले ही तेरे जिस्म को ना छुआ हो कभी,
- Ham
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- Dec 13, 2021
ज़िंदगी तेरी हसरतों से खफा कैसे हो,
तुझे भूल जाने की खता कैसे हो,
रूह बनकर समा गए हो हम में,
तो रूह फिर जिस्म से जुदा कैसे हो।
- Nasha
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- Dec 09, 2021
मोहब्बत है या नशा था जो भी था कमाल का था
रूह तक उतारते उतारते जिस्म को खोखला कर गया
- Dil
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- Jan 30, 2019
तेरे दिल को सजायेंगे अपने अरमान देकर,
तेरे लबो को हसाएंगे अपनी मुस्कान देकर !!
प्यार की कसम तुझे कबर से भी उठा लाएंगे,
तेरे जिस्म में हम अपनी सारी जान देकर !!
- Ehasaas
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- Jan 16, 2017