- Galti
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- Dec 13, 2021
Zid Shayari - Zid Hai To Jeet Bhi Hai
Haar ki parwah karta to jeetna hi chhod deta - yehi hai zid shayari ka jazba.
हार को मंज़ूर न करना, बल्कि हर हाल में जीतने का इरादा बनाए रखना - यह शायरी उसी अटूट इरादे की बात करती है जो पीछे हटने से इनकार कर देता है। इसी हौसले को Haar शायरी में और गहराई से पढ़ें।
- Last Updated on Aug 11, 2026
न जिद है न कोई गुरुर है हमे,
- Sad
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- Apr 09, 2021
उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो,
न हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो,
इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते हैं,
इसके साहिल पर घर बसाने की ज़िद न करो।
- Haar
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- Feb 25, 2021
हार की परवाह करता,,
तो मैं जीतना छोड़ देता,,
लेकिन “जीत” मेरी जिद है
और जिद का मैं बादशाह हूं!
- Khud
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- Feb 24, 2021
खुद से जीतने की जिद है मुझे खुद को ही हराना है,
मैं भीड़ नहीं हूं दुनिया की मेरे अंदर एक जमाना है..
- Jaroorat
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- Mar 27, 2019
जिस सफ़र से होकर तू आज मुकाम पर पहुंचा है,
उसी सफ़र में आज कई दीवाने चल निकले हैं,
जानते नहीं नादान इन्हें जरूरत है इक जिद की
नन्हें कदमो से नापने आसमान चल निकले हैं।
- Haar
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- Mar 17, 2019
वो सब रंग बेरंग हैं जो ढूंढते व्यापार होली में,
विजेता हैं जिन्हें स्वीकार हर हार होली में,
मैं मंदिर से निकल आऊँ तुम मस्जिद से निकल आना,
तो मिलकर हम लगाएंगे गुलाल-ए-प्यार होली में
- Meri
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- Aug 28, 2018
वक्त वो भी था जब ख्वाहिशें अपनी जिद पर थी
अब ये आलम है के तेरी रज़ा ही मेरी रजा लगती है...!