- Dil
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- Nov 29, 2021
Kumar Vishwas Shayari
Kumar Vishwas's Shayari - Read, Save and Share
A curated collection of shayari by Kumar Vishwas, Poet, Politician, explore verses that capture Kumar Vishwas's distinct voice.
- Last Updated on Aug 11, 2026
कितना मुश्किल है ख़ुद को ही ख़ुद के
- Hindi
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- Mar 14, 2021
खुशहाली में एक बदहाली, में भी हूँ और तू भी है
हर निगाह पर एक सवाली, में भी हूँ और तू भी है
दुनिया कितना अर्थ लगाए, हम दोनों को मालूम है
भरे-भरे पर खाली-खाली, में भी हूँ और तू भी है
- ADA
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- Mar 26, 2019
पुकारे आँख में चढ़कर तो खू को खू समझता है
अँधेरा किसको कहते है ये बस जुगनू समझता है !!
हमें तो चाँद तारो में तेरा ही रूप दिखता है
मोहब्बत में नुमाइश को अदाए तू समझता है !!
- Bhool
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- Mar 25, 2019
ये दिल बर्बाद करके, इसमें क्यों आबाद रहते हो
कोई कल कह रहा था तुम अल्लाहाबाद रहते हो.
ये कैसे शोहरते मुझे अता कर दी मेरे मौला
में सब कुछ भूल जाता हु मगर तुम याद रहते हो.
- Jawani
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- Mar 25, 2019
जब आता है जीवन में खयालातों का हंगामा
हास्य बातो या जज़्बातो मुलाकातों का हंगामा
जवानी के क़यामत दौर में ये सोचते है सब
ये हंगामे की राते है या है रातो का हंगामा
- Haar
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- Mar 25, 2019
हर एक नदिया के होंठों पे समंदर का तराना है,
यहाँ फरहाद के आगे सदा कोई बहाना है !
वही बातें पुरानी थीं, वही किस्सा पुराना है,
तुम्हारे और मेरे बिच में फिर से जमाना है…!!
- Bhool
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- Mar 25, 2019
कोई खामोश है इतना बहाने भूल आया हु
किसी की एक तरन्नुम में तराने भूल आया हु
मेरी अब राह मत ताकना कभी ऐ आसमा वालो
में एक चिड़िआ की आँखों में उड़ाने भूल आया हु.
- Hindi
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- Mar 24, 2019
हमें बेहोश कर साकी , पिला भी कुछ नहीं हमको
कर्म भी कुछ नहीं हमको , सिला भी कुछ नहीं हमको
मोहब्बत ने दे दिआ है सब , मोहब्बत ने ले लिया है सब
मिला कुछ भी नहीं हमको , गिला भी कुछ नहीं हमको !!
- Aansoo
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- Mar 24, 2019
फ़लक पे भोर की दुल्हन यूँ सज के आई है,
ये दिन उगा है या सूरज के घर सगाई है,
अभी भी आते हैं आँसू मेरी कहानी में,
कलम में शुक्र-ए- खुदा है कि ‘रौशनाई’ है
- Emotional
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- Mar 24, 2019
खुद से भी न मिल सको इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना मगर देवदास मत होना
देना , चाहना , मांगना या खो देना
ये सारे खेल है इनमें उदास मत होना !!
- Diwali
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- Mar 24, 2019
आँखें की छत पे टहलते रहे काले साये,
कोई पहले में उजाले भरने नहीं आया…!
कितनी दिवाली गयी, कितने दशहरे बीते,
इन मुंडेरों पर कोई दीप न धरने आया !!
- Bhool
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- Mar 23, 2019
वो जिसका तीरे छुपके से जिगर के पार होता है
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है
किसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले से
यहां खत भी जरा सी देर में अखबार होता है।
- Haasil
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- Mar 23, 2019
एक दो रोज में हर आँखें उब्ब जाती है,
मुझको मंजिल नहीं रास्ता समझने लगते है…!
जिनको हासिल नहीं वो जान देते रहते है,
जिनको मिल जॉन वो सस्ता समझने लगते है…!!
- Love
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- Mar 23, 2019
कोई कब तक महज सोचे, कोई कब तक महज गाये
इलाही क्या ये मुमकिन है के कुछ ऐसा भी हो जाये.
मेरा महताब उसकी रात के आगोश में पिघले.
में उसकी नींद में जागूँ वो मुझमे घुल के सो जाये.
- Sad
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- Mar 22, 2019
मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हे बतला रहा हूँ मैं
कोई लब छू गया था तब के अब तक गा रहा हु मैं
बिछुड़ के तुम से अब कैसे जिया जाए बिना तड़पे
जो में खुद हे नहीं समझा वही समझा रहा हु मैं..
- Koshish
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- Mar 22, 2019
उम्मीदों का फटा पैरहन,
रोज़-रोज़ सिलना पड़ता है,
तुम से मिलने की कोशिश में,
किस-किस से मिलना पड़ता है
- Ham
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- Mar 22, 2019