- Kahani
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- Dec 09, 2021
Kasoor Shayari
Kabhi apna kasoor, kabhi bas kismat ka khel.
Kasoor shayari un ashaar ka majmua hai jo pyaar mein lage ilzaam, chhipi galtiyon aur bewafa rishton ki sacchai bayaan karte hain - khud ko kasoorvaar maanna ho ya doosron ki najaayaz shikayat, poori tadap Bewafa shayari mein bhi milegi.
- Last Updated on Aug 11, 2026
वो छोड़ के गए हमें,
- Jeevan
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- Jul 09, 2019
जीवन में कभी किसी को कसूरवार न बनायें...
अच्छे लोग खुशियाँ लाते हैं बुरे लोग तजुर्बा...!!
- Chup
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- Feb 11, 2019
कसूर तो था ही इन निगाहों का जो चुपके से दीदार कर बैठा हमने तो खामोश रहने की ठानी थी पर बेवफा ये ज़ुबान इज़हार कर बैठा
- Khatm
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- Jul 22, 2018
घमण्ड से भी अक्सर खत्म हो जाते हैं,
कुछ रिश्ते.. कसूर हर बार गलतियों का नहीं होता।
- Diya
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- Jun 21, 2018
मदहोश हम हरदम रहा करते हैं,
और इल्ज़ाम शराब को दिया करते हैं,
कसूर शराब का नहीं उनका है यारों,
जिनका चेहरा हम हर जाम में तलाश किया करते हैं!!
- Hindi
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- Oct 27, 2016
मेरा उससे उम्मीद जोडना ही मेरे बर्बाद होने की वजह है
यूं बेवजह उस पर इल्जाम लगाना भी तो ठीक नहीं जब कसूर अपना हो
- Badan
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- Oct 23, 2016
बदनाम क्यूँ करते हो तुम इश्क को..
माल आपका चालु निकला इसमें इश्क का क्या कसूर??
- Haath
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- Oct 22, 2016