Kareeb Shayari - Doori Bhi, Apnapan Bhi

Paas hoke bhi kabhi doori mehsoos hoti hai - yehi hai kareeb shayari ka dard.

Kareeb Shayari - Paas Hoke Bhi Doori Ka Ehsaas

जो पास बैठा हो लेकिन दिल से कहीं और जुड़ा हो, वह दूरी शारीरिक फ़ासले से भी ज़्यादा गहरी लगती है - करीब शायरी इसी अधूरे अपनेपन को शब्द देती है। इसी बेपनाह चाहत के लिए Bepannah शायरी भी पढ़ें।


वक़्त अच्छा हो या बुरा, बस किसी का करीब होना ही सबसे बड़ी ख्वाहिश बन जाती है - इस भाव को Chaah और Ishq शायरी में और महसूस करें।