- Kadar
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- Dec 13, 2021
Paravaah Shayari
Waade kam, fikar zyada - yehi asli paravaah hai.
Ye sher duniya ki na-paravaahi aur kisi apne ki khamoshi bhari fikar ke beech ka fark dikhate hain. Dost ke liye ki gayi bepanaah fikar bhi isi topic ka hissa hai.
- Last Updated on Aug 11, 2026
चाहत के ये कैसे अफ़साने हुए,
- Apr 03, 2019
बेपरवाह तो रहिये...
मगर, बेख़बर नहीं...!!
- Jaan
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- Jun 27, 2018
सारी दुनिया के रूठ जाने की परवाह नहीं मुझे,
बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है।
- Dost
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- Jun 03, 2018
अपनी रातें उनके लिए ख़राब करना छोड़ दो दोस्तों,
जिनको ये भी परवाह नहीं की तुम सुबह उठोगे भी या नहीं।
- Dard-bhari
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- May 23, 2018
मसला ये नहीं है के दर्द कितना है,
ग़ालिब, मुद्दा ये है कि परवाह किस किस को है
- Raaz
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- Mar 31, 2017
एक परवाह ही बताती है कि ख़्याल कितना है,
साहब वरना कोई तराज़ू नहीं होता, रिश्तो में !!
- Had
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- Jan 26, 2017
बिन बताये सो जाते हो...
हद है लापरवाही की...!!!