- Milne
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- Dec 09, 2021
Naqaab Shayari
Sabne apne matlab ka naqaab odh rakha hai.
Kabhi nazrein milne se pehle hi chehre par naqaab aa jaata hai, kabhi koi apni asli pehchaan se hi darr kar naqaab pehen leta hai — yeh sher us chhupe hue sach ki baat karte hain jo dil mein daba rehta hai. Iske ulat jazbaat humari Benaqaab shayari mein milenge.
- Last Updated on Aug 11, 2026
टूटकर मेरे ही पलकों पर मेरा ख्वाब आ गया,
- Dil
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- Aug 22, 2021
किसी के दिल में क्या छुपा है
ये बस खुदा ही जानता है,
दिल अगर बेनकाब होता
तो सोचो कितना फसाद होता।
- Meri
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- Aug 11, 2021
दो अश्क मेरी याद में बहा जाते तो क्या जाता,
चन्द कालियां लाश पे बिछा जाते तो क्या जाता,
आये हो मेरी मय्यत पर सनम नक़ाब ओढ़ कर तुम,
अगर ये चांद का टुकडा दिखा जाते तो क्या जाता।
- Iman
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- Dec 08, 2020
भ्रष्टाचार है, चोरी है, बेईमानी, मक्कारी है,
शराफत का नकाब लगाकर बैठा सरकारी कर्मचारी है.
- Raat
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- Jan 10, 2019
अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी
तिरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए !!