- Dil
- |
- Dec 09, 2021
Lucknow Shayari
Nawabo ke shehar ki tehzeeb, har lafz mein.
Lucknow shayari leans hard on nostalgia — the city's famous tehzeeb, a wit that turns even sorrow into shayari, and a warmth locals swear no other shehar quite matches. If you searched for lucknow shayari 2 line couplets, this collection has plenty of short ones too. Pair it with Dil shayari for more heartfelt lines.
- Last Updated on Aug 11, 2026
दिल मेरा बनारस सा है,
- Kuch
- |
- Dec 09, 2021
कुछ तो बात है लखनऊ में
हर चेहरे की ख़ुशी से यारी है,
गमों में टूटते नहीं है लोग यहाँ
वे अदब से करने लगते शायरी है.
- Masoom
- |
- Dec 09, 2021
चालाकियाँ भरी है कोई दिल मासूम-सा नहीं मिलता,
शहर हमने बहुत देखे पर कोई लखनऊ-सा नहीं मिलता।
- Kuch
- |
- Dec 09, 2021
तुझ पर नहीं होता है क्या
प्रदूषणों का असर
मौन है क्यों
कुछ तो बता लखनऊ शहर?
रवीन्द्र प्रभात
- Meri
- |
- Dec 09, 2021
ज़मीन-ए-पाक हमारे जिगर का टुकड़ा है
हमें अज़ीज़ है देहली ओ लखनऊ की तरह
तुम्हारे लहजे में मेरी नवा का लहजा है
तुम्हारा दिल है हसीं मेरी आरज़ू की तरह
अली सरदार जाफ़री
- Dil
- |
- Dec 09, 2021
बेताबी में हर तरह से बर्बाद रहा
दिल अपना ग़म-ए-दहर से आबाद रहा
फिरता रहा हर शहर में मारा मारा
ऐ लखनऊ तू मुझ को मगर याद रहा
बाक़र मेहदी
- Shaam
- |
- Dec 09, 2021
फिजाओं में आज फिर से खूबसूरती दिखने लगी हैं,
शायद शाम-ए-लखनऊ का आग़ाज़ हो गया है.
- Dec 09, 2021
नए मिज़ाज के शहरों में जी नहीं लगता
पुराने वक़्तों का फिर से मैं लखनऊ हो जाऊँ
मुनव्वर राना
- Dil
- |
- Dec 09, 2021
आज कल हर कोई मुझसे रूठने लगा है,
हर किसी का साथ मुझसे छूटने लगा है,
बेदर्दों की दुनिया में लोगो को मनाते-मनाते
अब तो मेरा पत्थर दिल भी टूटने लगा है.
- Jeb
- |
- Dec 09, 2021
जब लखनऊ था,
तो खुशियां थी,
नाराजगी थी
थोड़ा गम था.
हसीन शामें थी
दोस्तों का साथ था
रोज पार्टी थी
जबकि जेब में पैसा कम था.
- Khali
- |
- Dec 09, 2021
लखनऊ की शाम निराली है,
यहाँ पकाते पुलाव ख्याली है,
सबका जेब तो खाली है
पर हर शख्स यहाँ का नवाबी है.
- Jaan
- |
- Dec 09, 2021
दिल करता है तेरी मोहब्बत में
कुछ ऐसा काम कर दूँ,
मेरी जान तुम कहो तो
पूरा लखनऊ तुम्हारे नाम कर दूँ.
- Delhi
- |
- Dec 09, 2021
दिल्ली छुटी थी पहले अब लखनऊ भी छोड़ें
दो शहर थे ये अपने दोनों तबाह निकले
मिर्ज़ा हादी रुस्वा
- Sarkari
- |
- Dec 09, 2021
बिरयानी की तरह सरकारी बजट खाना
और पान की तरह चबाना है
यह अहले लखनऊ है कुल्लू मनाली की बर्फ़ नहीं
जो गुड़ के साथ खाना है.
दयानन्द पाण्डेय
- Naam
- |
- Dec 09, 2021