- Adhuri
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- Jun 21, 2023
Kaagaz Shayari
Har lafz ke peeche kaagaz ka apna ek dard hai.
In sheron mein kaagaz kabhi kisi adhuri kahani ka gawah banta hai to kabhi patang ki tarah aasman chhoo leta hai. Shabdon aur ehsaas se juda ye topic Love shayari se bhi milta julta hai.
- Last Updated on Aug 11, 2026
अधूरी कहानी थी वो,
- Chaah
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- Jan 06, 2022
मैं हूँ पतंग-ए-काग़ज़ी डोर है उस के हाथ में
चाहा इधर घटा दिया चाहा उधर बढ़ा दिया
- नज़ीर अकबराबादी
- Ham
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- Jan 01, 2022
हमें दुनिया फ़क़त काग़ज़ का इक टुकड़ा समझती है
पतंगों में अगर ढल जाएँ हम तो आसमाँ छू लें
- नफ़स अम्बालवी
- Naav
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- Dec 13, 2021
मै क्या बताऊं कैसी परेशानियों में हूं,
काग़ज़ की एक नाव हूं और पानियों में हूं.!
- Chaahat
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- Jul 06, 2018
मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं
सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़—ए—माँ रहने दिया
- Hindi
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- Sep 03, 2017