ये क्या उठाये क़दम और आ गई मन्ज़िल

ये क्या उठाये क़दम और आ गई मन्ज़िल

ये क्या उठाये क़दम और आ गई मन्ज़िल
मज़ा तो जब है के पैरों में कुछ थकान रहे


Ye kya uthaaye qadam aur aa gaee manzil
Maza to jab hai ke pairon mein kuchh thakaan rahe