Kuch Shayari - Kuch Kaha, Kuch Adhoora Sa

Kabhi-kabhi "kuch" mein hi poori kahaani chhup jaati hai.

ग़रीबी की सच्चाई हो या किसी की यादों का नशा - Kuch shayari किसी एक मूड में बंधी नहीं रहती, वक़्त के बदलते पहिये की बात भी यहीं मिलती है। यही मिलाजुला अंदाज़ इसे खास बनाता है। छोटे फॉर्मेट में ऐसे ही जज़्बात के लिए 2 Line पढ़ें।


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