- Hindi
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- Jul 06, 2023
Kuch Shayari - Kuch Kaha, Kuch Adhoora Sa
Kabhi-kabhi "kuch" mein hi poori kahaani chhup jaati hai.
ग़रीबी की सच्चाई हो या किसी की यादों का नशा - Kuch shayari किसी एक मूड में बंधी नहीं रहती, वक़्त के बदलते पहिये की बात भी यहीं मिलती है। यही मिलाजुला अंदाज़ इसे खास बनाता है। छोटे फॉर्मेट में ऐसे ही जज़्बात के लिए 2 Line पढ़ें।
- Last Updated on Aug 11, 2026
कुछ लोग सिने में दिल नहीं, कब्रिस्तान लिए फिरते है साहब;
- Aukat
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- Jul 06, 2023
भूख और ठोकर बहुत कुछ सिखा देते हैं,
गरीबी में लोग अक्सर अपनी औकात दिखा देते हैं !!
- Haar
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- Jul 06, 2023
वक़्त का पहिया कुछ ऐसे मोड़ पर
चल पड़ा है,
बहार है मौत का साया, और अंदर
इंसान जी के भी मरा है !!
- Hindi
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- Jun 22, 2023
कुछ पैसे मैंने आज भी बचा कर रखें हैं,
तुमसे बिछड़कर उन्हें शराब पर ख़र्चेगें !!
- Matalab
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- Jun 21, 2023
शब्दों के बीच की ख़ाली जगह हूँ.
मेरा मतलब कुछ भी नहीं !!
पर मैं नहीं तो इन शब्दों का,
मतलब कुछ भी नही !!
- Kadar
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- Jun 21, 2023
पानी मे लहरों की भाती,
मैं बहता चला गया !!
तेरे प्यार मे कुछ इस कदर,
मैं पागल होता चला गया !!
- Chup
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- Jan 30, 2022
कुछ अपना अंदाज हैं कुछ मौसम रंगीन हैं,
तारीफ करूँ या चुप रहूँ जुर्म दोनो ही संगीन हैं।
- Husband
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- Jan 30, 2022