मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट

मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट

मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट

मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट
मेरा नादान गाँव अब भी उलझा है कर्ज की किश्तों में


Mere khet kee mittee se palata hai tere shahar ka pet
Mera naadaan gaanv ab bhee ulajha hai karj kee kishton mein