माना कि इस जमीं को न गुलजार कर सके Pradeep / Aug 11, 2026 माना कि इस जमीं को न गुलजार कर सके माना कि इस जमीं को न गुलजार कर सके कुछ खार* कम तो कर गये, गुजरे जिधर से हम !! (खार = कांटे) Mnaa ki is jameen ko na gulzaar kar sake Kuchh khaar kam to kar gaye, gujare jidhar se ham Shayari Ham Shayari Kuch Shayari Sad Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026