बेचैनी का जब बढ़े मन में विचार,

बेचैनी का जब बढ़े मन में विचार,

बेचैनी का जब बढ़े मन में विचार,
गंगा में डुबकी लगायें आकर हरिद्वार.


Bechainee ka jab badhe man mein vichaar,
Ganga mein dubakee lagaayen aakar haridvaar.