बर्बाद ना कर ज़ालिम ठोकर से मजारों को

बर्बाद ना कर ज़ालिम ठोकर से मजारों को

बर्बाद ना कर ज़ालिम ठोकर से मजारों को

बर्बाद ना कर ज़ालिम ठोकर से मजारों को
इस शहर-ए-खामोशा को मर-मर के बसाया है


Barbaad na kar zaalim thokar se majaaron ko
Is shahar-e-khaamosha ko mar-mar ke basaaya hai