बर्बाद ना कर ज़ालिम ठोकर से मजारों को Admin / Aug 11, 2026 बर्बाद ना कर ज़ालिम ठोकर से मजारों को बर्बाद ना कर ज़ालिम ठोकर से मजारों को इस शहर-ए-खामोशा को मर-मर के बसाया है Barbaad na kar zaalim thokar se majaaron ko Is shahar-e-khaamosha ko mar-mar ke basaaya hai Shayari Barbaad Shayari Khamosh Shayari Mar Shayari Sad Shayari Shahar Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026