छलक जाती हैं कुछ बूंदें मेरी आँखों से अक्सर ही

छलक जाती हैं कुछ बूंदें मेरी आँखों से अक्सर ही

छलक जाती हैं कुछ बूंदें मेरी आँखों से अक्सर ही

छलक जाती हैं कुछ बूंदें मेरी आँखों से अक्सर ही
मैं जब भी नज़्म लिखती हूँ तुम्हें कागज पे लिखती हूँ


Chhalak jaatee hain kuchh boonden meree aankhon se aksar hee
Main jab bhee nazm likhatee hoon tumhen kaagaj pe likhatee hoon