खामोश होकर हर दुख-दर्द को सहते रहे,

खामोश होकर हर दुख-दर्द को सहते रहे,

खामोश होकर हर दुःख-दर्द को सहते रहे,
मैं घाट सा ठहरा और वो यमुना सी बहते रहे.


Khaamosh hokar har duhkh-dard ko sahate rahe,
Main ghaat sa thahara aur vo yamuna see bahate rahe.