- Oct 21, 2016
Shahar Shayari - Sheher Ki Khamoshi Aur Kahani
Har shahar ki apni ek chuppi hoti hai - shahar shayari usi ko sunati hai.
धुंधले दिनों और नशीली रातों की कहानी कहने वाले शहरों से लेकर ग़ालिब के आगरा तक, shahar shayari हर शहर की अपनी एक अलग कहानी सुनाती है। छोटे अंदाज़ में यही बात 2 Line में भी मिलती है। We have created a collection of some of the best shahar shayari so you can read and share anytime with your friends and family. Share our Top 10 Shahar Shayari on Facebook, Twitter, and Pinterest.
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- Last Updated on Aug 11, 2026
कहीं फिसल न जाऊं तेरे ख्यालों में चलते चलते,
- Din
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- Oct 21, 2016
इन खुदगर्ज़ शहरों के दस्तूर कुछ ऐसे ही होते हैं दोस्तों...
चंद दिनों की ख़ामोशी में यहाँ लोग भुला दिए जाते हैं...!!
- Phool
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- Oct 21, 2016
शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए...
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए...!!
- Gulaab
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- Oct 21, 2016
छु कर निकलती है जो हवाएँ तेरे चेहरे को...
सारे शहर का मौसम गुलाबी हो जाता है...!!
- Hindi
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- Oct 21, 2016
मेरे पास ही था उसके तमाम ज़ख़्मों का मरहम...
मगर कहाँ दिखायी देती हैं बड़े शहर में छोटी दुकाने...!!
- Bura
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- Oct 21, 2016
मेरा बसेरा अब उस शहर अदावत में है साहब...
जहाँ लोग सजदों में भी लोगों का बुरा चाहते हैं...!!
- ADA
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- Oct 21, 2016
किरदार को अपने यूं न बयां करो खुल कर...
ये शरीफों का शहर है अदाकारी जरूरी है...!!
- Sad
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- Oct 21, 2016
बड़ी अजीब सी हैं शहरों की रोशनी...
उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल हैं...!!
- Ajeeb
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- Oct 15, 2016
अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा जिसे वो 'शहर' कहते हैं...
जहाँ लोग मिलते कम, झाँकते ज्यादा हैं....
- Gulaab
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- Oct 15, 2016
सिर्फ गुलाब देने से अगर मोहब्बत हो जाती,
तो माली सारे 'शहर' का महबूब बन जाता...