- Delhi
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- Dec 09, 2021
Mukammal Shayari
Adhoore jazbaat, poori shayari
Kisi shehar mein apna ghar na milna ho ya kisi rishte ka baar-baar imtihaan lena, yeh mukammal shayari zindagi ki adhoori chahaton ko seedhe dil se kehti hai. Isi tarah ke aur jazbaat Dil mein bhi milenge.
- Last Updated on Aug 11, 2026
कहीं मुकम्मल जमीन नहीं मिलती,
- Aaj
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- Jul 08, 2019
भरोसा करो तो मुकम्मल...
वफ़ा रोज़ रोज़ मत आज़माओ...!!
- Jaan
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- Jan 31, 2019
जागने से मिल जाती गर मोहब्बत वापिस किसी को,
तू हर सुबह जाने कितनों का इश्क़ मुकम्मल हो जाता..
- Dast
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- Mar 04, 2017
धागा ही समझ,तू अपनी मन्नत का मुझे.
तेरी दुआओ के मुकम्मल होने का दस्तूर हूँ मैं..
- Ghar
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- Oct 22, 2016
घर की इस बार मैं..मुकम्मल तलाशी लूँगी,
देखूं, ग़म छुपा कर..मेरे माँ बाप कहाँ रखते हैं।
- Mushkil
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- Oct 21, 2016
रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ी हूँ...
ऐ मुश्किलो देखो मै तुमसे कितना बड़ी हूँ...!!
- Bikhar
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- Oct 21, 2016