- Damdaar
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- Aug 29, 2025
Kala Shayari
Har sher ka apna rang, koi ek dhaaga nahi bandhta.
Ye topic ek seedhi theme nahi, balki zindagi ke bikhre hue ehsaas sameta hai - kisi ke kamzor samjhe jaane par dumdaar nikalne se lekar dhoop mein bhi ujaale ki umeed tak. Aankh mein chhupi yehi ummeed har sher mein hai.
- Last Updated on Aug 11, 2026
जिसे समझे थे कमज़ोर, वही निकला दमदार,
- Aaj
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- Jan 27, 2022
तुम्हारे जाने से चला गया है जीवन से प्रेम का रंग
आज तरबूज भी अंदर से सफेद निकला !!
- Samosa
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- Dec 09, 2021
कड़ाही से निकला अभी-अभी उफ़्फ़ ये कातिल समोसा,
अमीर-गरीब सबकी खुशियों में शामिल समोसा.
- Ghar
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- Dec 09, 2021
जागती आँखों से देखूँगा जिन्हें मैं
बस वही ख्वाब हकीकत के हवाले होंगे,
मैं कड़ी धूप में निकला हूँ इसलिए बाहर
मैं जलूँगा तो मेरे घर में उजाले होंगे।
- Aankh
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- Jul 18, 2018
दर्द आँखों से निकला तो सबने बोला कायर है ये,
जब दर्द लफ़्ज़ों से निकला तो सब बोले शायर है ये।
- Alvida
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- Jan 15, 2018
कहते हैं अलविदा हम अब इस जहान को,
जा कर ख़ुदा के घर से अब आया न जाएगा,
हमने लगाई आग हैं जो इंकलाब की,
इस आग को किसी से बुझाया ना जाएगा.
- Daur
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- Jan 24, 2017
बाँधा तो था हमने भी,एक धागा उनके नाम का.....
पर वो भी कच्चा निकला,मिलावट के इस दौर मे !
- Kal
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- Jan 24, 2017
गर्म कपड़ों की पेटियाँ सारी खुल गयीं साहब..
प्यार में बुना कोई स्वेटर नहीं निकला...!
- Dil
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- Jan 18, 2017