न आँखों से छलकते हैं न कागज पर उतरते हैं

न आँखों से छलकते हैं न कागज पर उतरते हैं

न आँखों से छलकते हैं न कागज पर उतरते हैं

न आँखों से छलकते हैं, न कागज पर उतरते हैं,
दर्द कुछ ऐसे होते हैं जो बस भीतर ही पलते हैं...!


Na aankhon se chhalakate hain, na kaagaj par utarate hain,
Dard kuchh aise hote hain jo bas bheetar hee palate hain...!