अब ये न पूछना कि ये अल्फ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ

अब ये न पूछना कि ये अल्फ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ

अब ये न पूछना कि ये अल्फ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ,
कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के कुछ अपनी सुनाता हूँ।


Ab Na Puchhna Ki Yeh Alfaz Kahan Se Lata Hun,
Kuchh Churata Hun Dard Dusron Ke Kuchh Apni Sunata Hun.