हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो Admin / Aug 11, 2026 हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो, ये ज़िंदगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो। Har Ek Chehre Ho Zakhmo Ka Aayina Na Kaho, Ye Zidagi Toh Hai Rahmat Ise Sazaa Na Kaho. Shayari Rahamat Shayari Zindagi Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026