हजार ग़म मेरी फितरत नहीं बदल सके

हजार ग़म मेरी फितरत नहीं बदल सके

हजार ग़म मेरी फितरत नहीं बदल सके,
क्या करूँ मुझे आदत है मुस्कराने की।


Hajaar gam meree phitarat nahin badal sake,
Kya karoon mujhe aadat hai muskaraane kee.