शायरी में कहाँ सिमटता है दर्द-ए-दिल दोस्तो

शायरी में कहाँ सिमटता है दर्द-ए-दिल दोस्तो

शायरी में कहाँ सिमटता है दर्द-ए-दिल दोस्तो,
बहला रहे हैं खुद को जरा कागजों के साथ।


Shayari Mein Kahan SimatTa Hai Dard-e-Dil Dosto,
Bahla Rahe Hain Khud Ko Jara Kagazon Ke Saath.