वो मेरी चाहत का एक लफ्ज भी ना समझ सकी

वो मेरी चाहत का एक लफ्ज भी ना समझ सकी

वो मेरी चाहत का एक लफ्ज भी ना समझ सकी... मैं जिसके दिए हुए दर्द कि किताबें पढंते पढ़ते अक्सर सो जाता हूँ.


Vo meree chaahat ka ek laphj bhee na samajh sakee... main jisake die hue dard ki kitaaben padhante padhate aksar so jaata hoon.