ले रहा है तू खुदाया इम्तेहाँ दर इम्तेहाँ

ले रहा है तू खुदाया इम्तेहाँ दर इम्तेहाँ

ले रहा है तू खुदाया इम्तेहाँ दर इम्तेहाँ,
पर स्याही ज़िंदगी की खत्म क्यूँ होती नहीं।


Le Raha Hai Tu Khudaya Imtehaan Dar Imtehaan,
Par Syaahi Zindagi Ki Khatm Kyun Hoti Nahi.