रूह जिस्म का ठौर ठिकाना चलता रहता है Admin / Aug 11, 2026 रूह जिस्म का ठौर ठिकाना चलता रहता है रूह-जिस्म का ठौर-ठिकाना चलता रहता है जीना-मरना खोना-पाना चलता रहता है Rooh-jism ka thaur-thikaana chalata rahata hai Jeena-marana khona-paana chalata rahata hai Shayari Hindi Shayari Mar Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026