रुकी रुकी सी लग रही है नब्ज ए हयात

रुकी रुकी सी लग रही है नब्ज ए हयात

रुकी रुकी सी लग रही है नब्ज ए हयात

रुकी-रुकी सी लग रही है नब्ज-ए-हयात,
ये कौन उठ के गया है मेरे सिरहाने से।


Rukee-rukee see lag rahee hai nabj-e-hayaat,
Ye kaun uth ke gaya hai mere sirahaane se.