मेरे शायरी की छांव में आकर बैठ जाते है

मेरे शायरी की छांव में आकर बैठ जाते है

मेरे शायरी की छांव में आकर बैठ जाते है

मेरे शायरी की छांव में आकर बैठ जाते है,
वो लोग जो मोहब्बत की धूप में जले होते है।


Mere shaayaree kee chhaanv mein aakar baith jaate hai,
Vo log jo mohabbat kee dhoop mein jale hote hai.