मुकम्मल हो ही गयी आखिर आज ज़िन्दगी की ग़ज़ल Admin / Aug 11, 2026 मुकम्मल हो ही गयी आखिर आज ज़िन्दगी की ग़ज़ल मुकम्मल हो ही गयी आखिर, आज ज़िन्दगी की ग़ज़ल... मेरे महबूब ने भी उसको पढ़कर, वाह-वाह बोला है.. Mukammal ho hee gayee aakhir, aaj zindagee kee gazal... Mere mahaboob ne bhee usako padhakar, vaah-vaah bola hai.. Shayari Love Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026