महक रही है ज़मीं चांदनी के फूलों से

महक रही है ज़मीं चांदनी के फूलों से

महक रही है ज़मीं चांदनी के फूलों से,
ख़ुदा किसी की मुहब्बत पे मुस्कुराया है।


Mehak Rahi Hai Zamin Chaandni Ke Phoolo Se,
Khuda Kisi Ki Muhabbat Pe Muskuraya Hai.