न लफ़्ज़ों से लहू बहता है न किताबें बोल पाती हैं Admin / Jul 24, 2021 न लफ़्ज़ों से लहू बहता है न किताबें बोल पाती हैं न लफ़्ज़ों से लहू बहता है न किताबें बोल पाती हैं, मेरे दर्द के दो ही गवाह थे दोनों ही बेजुबान निकले। Na Lafzon Se Lahoo Bahta Hai Na Kitabein Bol Pati Hain, Mere Dard Ke Do Hi Gawaah The Dono Hi Bejubaan Nikle. Shayari Dard-bhari Shayari