न ख्वाहिशें हैं न शिकवे हैं अब न ग़म हैं कोई Admin / Aug 05, 2021 न ख्वाहिशें हैं न शिकवे हैं अब न ग़म हैं कोई न ख्वाहिशें हैं न शिकवे हैं अब न ग़म हैं कोई, ये बेख़ुदी भी कैसे कैसे ग़ुल खिलाती है। Na Khwahishe Hain Na Shikwe Hain Ab Na Gham Hai Koi, Yeh Bekhudi Bhi Kaise Kaise Gul Khilati Hai. Shayari Sad Shayari