दिल है कदमों पे किसी के सर झुका हो या न हो

दिल है कदमों पे किसी के सर झुका हो या न हो

दिल है कदमों पे किसी के सर झुका हो या न हो,
बंदगी तो अपनी फ़ितरत है ख़ुदा हो या न हो।


Dil Hai Kadmon Pe Kisi Ke Sar Jhuka Ho Ya Na Ho,
Bandgi Toh Apni Fitrat Hai Khuda Ho Ya Na Ho.