दर्द हमारा फैला पड़ा था कागज पर Admin / Aug 11, 2026 दर्द हमारा फैला पड़ा था कागज पर दर्द हमारा फैला पड़ा था कागज पर, जो समझा रो दिया जो न समझा मुस्कुरा दिया। Dard Humara Phaila Pada Tha Kagaz Par, Jo Samjha Ro Diya Na Samjha Muskura Diya. Shayari Dard-bhari Shayari
किसी का इंतज़ार नहीं करती, अपनी राह खुद बनाती हूँ, गिरूँ तो खुद उठती हूँ, हर मंज़िल खुद पाती हूँ। Sep 24, 2026