तुम्हारा दिदार और वो भी आँखों में आँखें डालकर

तुम्हारा दिदार और वो भी आँखों में आँखें डालकर

तुम्हारा दिदार और वो भी आँखों में आँखें डालकर,
ये कशिश कलम से बयाँ करना भी मेरे बस की बात नहीं!


Tumhaara didaar aur vo bhee aankhon mein aankhen daalakar,
Ye kashish kalam se bayaan karana bhee mere bas kee baat nahin!