तुम अच्छे हो तो बेहतर, तुम बुरे हो तो भी कबूल

तुम अच्छे हो तो बेहतर, तुम बुरे हो तो भी कबूल

तुम अच्छे हो तो बेहतर, तुम बुरे हो तो भी कबूल

तुम अच्छे हो तो बेहतर, तुम बुरे हो तो भी कबूल,
हम मिज़ाज-ऐ-दोस्ती में ऐब-ऐ-दोस्त नहीं देखा करते।


Tum achchhe ho to behatar, tum bure ho to bhee kabool,
Ham mizaaj-ai-dostee mein aib-ai-dost nahin dekha karate.